सिक्खी दफ़्न नहीं

क्या सोचत हो? सिक्खी नहीं मिटा पाओगे सोचो क्यों चलो व्यंग भी कर लें इक पल तीन हस्तियां हैं—ट्रिनीटी कहि लें पारब्रह्म परमेसर—श्री अकाल गुर परमेसर—बाबा नानक सिक्ख परमेसर—जैसे की हम आपसे हम तीनों में सिर्फ हम छोटे है वो दो नहीं मुझे डारदेने से सिक्ख मरेगा सिक्खी दफ़्न नहीं!

Rarest are those Star-Sun-likes

Countless can ride on waves —cry for waves. Very human-like. Earth-Moon-likes cause waves & undercurrents some that are gentle, others mysterious & hurtful. Rarest are those Star-Sun-likes who affect deep currents. But One Unknowable, Who Causes elements those cause currents!

ਵਿਰਲੇ ਹੁੰਦੇਨ ਰਵਿਤਾਰਿਆਂ ਆਂਗੂੰ

ਬਹੁਤੇ ਤੇ ਬਸ ਆਦਮਜਾਏ ਤਰੰਗਨਾਵੀਂ ਖਿੜਦੇ ਕੁਝ ਹਸਦੇ ਖੇਡਦੇ ਕੁਝ ਲੋਚਦੇ ਧਰਤਿ-ਚੰਨ੍ਹੇਰੇ ਕੁਝ’ਕੁ ਹੋਵਣ ਤਰੰਗਾਂ ਛਲਕਦੇ ਵਲਵਲੇ ਜਨੰਦੇ ਕਦੇ ਕੋਮਲ ਕਦੇ ਰਹਿਸੀਲੀ ਤੇ ਕਦੇ ਦਿਲਚੀਰ ਵਿਰਲੇ ਹੁੰਦੇਨ ਰਵਿਤਾਰਿਆਂ ਆਂਗੂੰ ਅੰਤਿਹਕਰਣ ਕੰਬਣੀ ਜਿਹ ਤ੍ਰਬਕਣ ਹੌਲੀ ਮੱਧਮ ਦੂਰ ਲੰਮੇਰੀ ਚੁੱਪ ਚੁਪਿੱਤੀ ਇੱਕ ਅਗਮਅਗਾਧ ਕਰਤਾਭੋਗੀ ਕਰਣਕਾਰਣ ਜੁਗੋਜੁਗ ਹੋਸੀ!

Devotion

Devotion’s like a mother so kind who like the sun cares for all her children incapable of looking at their dark doting on their bright sides making them dance swirl in joy bathing their pains forlornness away So humble so blind lies she basks in their glory not her wards in hers! Devotion isn’t anything … Continue reading

Haqq

TippaNi karaN dā haqq vi kamāeya jandā ae ni sakhiye Jān bujjh ke kittī galtī galtī hundī ae aNjānpuNe wich reh gayi toT ikk muhabbati gehNā! Savāl karaN dā haqq vi kamāeyā jandā ae ni sakhiye Bagair vichāreyān savāl savāl ni bannde Bagair rijjheyān jawāb ī koinā!

अफ़वाहें

अफ़वाहें अमरीका जैसे मुल्क में भी फैलती हैं भीड़ वहाँ भी भड़कती भगदड़ वहाँ भी मचती ज़िन्दगी के लाले वहाँ भी पड़ते हैं नफ़रत के नाम पर क़ातिल क़त्ल भी करते हैं मौतें वहाँ भी होती है। मेरे वतन को ही पिछड़ा मति कहो रे आस की किरण वहाँ तो जगती है ज़रूर यहाँ भी … Continue reading

सबूत

सूरज से माँगा है सबूत बता की कित्ते ग्रह रोशन किये अहं कहाँ दुष्टों के जलाये कहाँ दफ़न किये चाँद से कभी सवाल किये कित्ते आशिक़ आज बना दिए आस के दीये कित्ते जल रहे कित्ते सुलग गये कोयल से पूछा कभी गीत कितने गा लिये भेद कैसन सुलझा लिये हमसे फिर सवाल करने की … Continue reading

फ़र्क़

फ़र्क़ बस इतना ही था आप फ़सल तहसनहस करना बरबाद कर देना जानते हो हम हल चलाना बीज बोवना ऊगती फ़सल की परवरिश कमज़ोर बूटों को सहारा फल बटोरना आबाद करना मिलबाँट खाना ख़ूब जानते हैं। आप तबाह करते रहे हम आबाद! (Translation) 5.10.2014 Sukhmani Niwas, Tarn Taran Punjab 10:30 AM

बंदा ना सुधरेगा

यह तो आज ही पता लगता है फिर याद यह दिलाया जाता है की “सच्च” को भी जीतने के लिए “झूठ” से फ़रेब करना पड़े है तनिक मक्कार होना पड़े है! यह तो खुदा ही जाने की झूठ क्या और सच क्या मैं जब भी मिलता हूँ सच से औ झूठ से दोनों को “हम … Continue reading

सचु हारि कमावै झूठ

सच्च को मैंने भांपा नहीं झूठ अभी भी त्यागा नहीं क़दम एक उदासी चला नहीं मन आसनिरासि हुआ नहीं क्या जानूँ क्या सच होवे है और ना स्यानूँ झूठ। कौन किस पे हारिया किस वारिया कै डारिया किस छलिया अहं जालिया परतपालिया सुहागनाविया झूठ ना बोले झूठ रे लोगो सचु हारि कमावै झूठ। मुबारक? अफ़सोस?